पहाड़ो का जनजीवन में जागती एक ने उद्देश:-
इ साल गर्मियों का समय मा लोग बारिश खिन तर्शी गया पर देर से बरखा आई गए ! इ साल 2012 मा जैसे ही बरखा आई लोग धनु की रोपाई शुरू कर दे आजकल त धन लागुन में मज़ा आणि चा लोग बड़ा खुश हुआ छीन मन
म्यार भी करना चा की घर जाऊ और धनु लगुन व गौं का भौजियो का दगड और धान का पुन्ग्ड़ो मा भोजियो पर कचायर लिपोड़ी दूँ पर हमार
भाग में इन नी लुखुचा दिल्ली मा छोऊ ये चोमास का दिनों ईख मा अजीव लगुना चा पर क्य कन ये निठूर पेटू खातिर रणु छू ! घरगा का याद आणि चा ! पहाड़ो मा एक तरफ कुहेडी लगी होला एक तरफ घाम लगी होली लोग विचारा मज़े करणु होला ! स्कूल अभी -अभी जुलाई मा खुल्या होला ने छोटू -छोटू नान जाणा
इ साल गर्मियों का समय मा लोग बारिश खिन तर्शी गया पर देर से बरखा आई गए ! इ साल 2012 मा जैसे ही बरखा आई लोग धनु की रोपाई शुरू कर दे आजकल त धन लागुन में मज़ा आणि चा लोग बड़ा खुश हुआ छीन मन
म्यार भी करना चा की घर जाऊ और धनु लगुन व गौं का भौजियो का दगड और धान का पुन्ग्ड़ो मा भोजियो पर कचायर लिपोड़ी दूँ पर हमार
भाग में इन नी लुखुचा दिल्ली मा छोऊ ये चोमास का दिनों ईख मा अजीव लगुना चा पर क्य कन ये निठूर पेटू खातिर रणु छू ! घरगा का याद आणि चा ! पहाड़ो मा एक तरफ कुहेडी लगी होला एक तरफ घाम लगी होली लोग विचारा मज़े करणु होला ! स्कूल अभी -अभी जुलाई मा खुल्या होला ने छोटू -छोटू नान जाणा
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