शनिवार, 18 मई 2013

हेल्लो आप लोगो तै स्यो सौ

प्रणाम ,
                                                  पांड्वो कौथिग     (डाली मेला) 


ग्राम रिक्साल, पट्टी - चौथान, तहसील - थलिसेँण, जिला -  पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड    मा पांड्वो कौथिग बड़ा ही प्रसिध चा ३ दिन ३ रात  को होने वाली इस मैला मैं कुमाऊ गढ़वाल ( पौड़ी , चमोली रुद्रप्रयाग ) के लोग इस मैला मैं सामिल होते है
इस स्थान पर आपको लगेगा की आप ही पुरातन सस्कृत का मिला जुला असर है
पांड्वो का नाचण का एक अदभुत कौथिग जो आज भी जीवित है

पुराने समय में  बिचला रिक्साल का  पुच्यारी जो की किसी रहिस परिवार का गाय व् भेसों  का ग्वाला हुवा करता था गाँव मैं  ( जो कहा जाता है उस समय चीड़ का पूरा पूरा पेड़ ले आये थे) और दसो का धिवाव ( वद्या यन्त्र ढोल दमाऊ) का इक चाल धिवाव कहलाता है  वो बिच मैं ही बंद हो गया था! और पुच्यारी जी चीड के पेड़ के निचे दब गए थे 
 आज के समय मैं न तो प्रेम सिंह  और जगत सिंह रहा
 1 . प्रेम सिंह पुच्यारी
२ .जगत  सिंह पुच्यारी
जगत के बेटे   मोहन सिंह पुच्यारी ( गुड्डी भाई) जिन पर भीम देवता का अवतार है वो हर सालो की भांति केले का पेड़ लेते है इस प्रकार हर वर्ष लगने वाला डाली का कौथिग चौमास के महीने लगता ही रहता है यह स्थान थलिसेँण से 3०  कि० मी ० बेजरो  से 30 k  m गैरसेँण 3o k m  रानीखेत से 3 0  कि मी लगभग सभी क्षेत्रो के मध्य मैं है    

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें