प्रणाम ,
सर्देह म्यार उत्तराखंडी गढ़वाली और कुमौनी यूथ,
म्यार उत्तरखंड की सस्कृति पर एक लेख :-
हमरी रीती रिवाज ये देश माँ अलग पहचान च जेई माँ सकानी ( सक्रांति ) ख्योव मौव ( मेला ) यु की अलग पहचान च ! १ . सकानी ( सक्रांति ) हर्याई ( हरेला ) , घुव सक्रांति , खतुडवा ( जो कुमौनी में होती है ) बग्वाई , इगाशी , फूल सकंती ( जो केवल बुरांस व फ्योली की फूलो की होती है जो सम्पूर्ण गढ़वाल व कुमाऊ में मनाया जाता है )
मौव ---------- नंदा देवी का जात्रा ( यात्रा ) नौटि चमोली,
बागेश्वर का मेला - बागेश्वर
माँ भगवती का मेला - जो लगभग पूरा गढ़वाल व कुमाऊ में मनाया जाता है जो इस प्रकार से है --- देघाट की भगवती - अष्टमी का मेला ( गर्मियों में ) चक्रगाँव की भगवती ( स्यादे अल्मोड़ा )
बुड केदार का मेला ( केदार अल्मोड़ा ) महा मायी - माशी चौकोटिया के कुछ अंशो में ( अल्मोड़ा) बैजनाथ की नंदा का कौथिग , ( अल्मोड़ा ) , अल्मोड़ा का कौथिग ( अल्मोड़ा) सोनी बिनसर का मेला ( रानीखेत अल्मोड़ा )
सतपुली का मेला - सतपुली ( पौड़ी ) बुबा खाल का जतवाडा ( पौड़ी ) बिन्देश्वर का मेला ( चौथान थेलिसेँण पौड़ी) गौचर का मेला (गौचर रुद्रप्रयाग ), हरयाली देवी का मेला ( रुद्रप्रयाग ) माँ चन्द्रबदनी ९ टिहरी उत्तरकाशी ) मैन्ठाना की माई , माँ कुंज पूरी और अनेक मेला पहाड़ो में मनाया जाता है जो आज भी फाड़ की संस्कृत की पहचान व अपनी पहाड़ो की धरोहर है
१ - पहनावा :- आज दुनिया चाहे 21 वीं शादी मैं जी रहे है लेकिन म्यार पहाड़ का लोग वे रीती रिवाज पै कायम छि . अगर आप जौनसार टिहरी की घगरा, और निति माणा चमोली अंगणा, और हमरी तराई क्षेत्र कुमौनी की पिछोंड़ी वे जमाना मैं भी छे और आज भी चा,
पुरुष वर्ग मां ---- कुमौनी - कुर्ता चूड़ीदार पैजामा ,चमोली - पैंट ,कुर्ता, वास्कट ( एक प्रकार से कोट का अंश ) और सफेद टुपुला ( टोपी ) , कुछ - 2 राठ क्षेत्र माँ टालुक ( सफेद चादर ) निकर या चुस्ती , सर मैं सफेद या काली टोपी, टिहरी जौनसार की बात ही कुछ अलग है , और हम अगर अपने तराई क्षे त्र की बात करे जो रामनगर भाबर व् कोटद्वार भाबर इनका प्रचालन सम्पूर्ण भारत की तरह है
2 . खान पान :- हाँ ये बात तै कोई इंकार नि कर सकदी की पहाड़ की खानपान मैं काफी हद तक बदलाव आगिना, जू लोग . टिहरी , उत्तरकाशी . चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर , पीथोड़ागढ़ , अल्मोड़ा कुछ अंश मैं अभी भी , छोई ( कड़ी ) - भात , कौदा( चुने व् मडुवे ) की रोटी, गडेरी का साग, हरुव पातु की भुजी ( साग) सबसे अच्छु साग तै पहाड़ी आलू की हुन्दी ( पहाड़ी आलू पहाड़ के कुछ - २ अंशो मैं पाया जाता है ) पहाड़ की प्रशिध्द झुगौरा का भात खीर, मुली का टप्ख्या ( सलाद) भटुग चत्क्वाणी, गौथुग दोंयाव रोटी ( गहत की पराठें) कहदी मे मज़ा आई जांदी यार .
3 . रिश्ता : दादा - दादी गढ़वाली में - दादा -दादी,
कुमौनी में - बुबू आमा माता पिता गढ़वाली में माँ पिताजी , बोई - बबा
कुमौनी में - इजा भाज्यू
भाई -----भावन सिंह मनाई
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