गुरुवार, 16 जून 2011

माँ केवल गढ़वाली भाषा मे

उत्तराखंड की माटी मैं पले बढ़े लोगो को धन्यवाद
गाँव माँ पल्या बधया नौंन नौनी तै ढेर सरू प्यार ,  और दग डया दगडयो तै स्नेह , अर दान स्याणों चरण छुई की स्यो, म्यार भाई बन्दों आज का ये भौतिग बाद का युग माँ दुनिया चाँद पर पहुची गेइना लेकिन म्यार पहड़ी लोगो का संस्क्रीती माँ भाई फर्क आणि बढ़ी गेइना , अगर हम ही खुद अपणा रीति रिवाजो तै भूली जौला तब हमारा बच्चा क्या देखला माँ बहनों व् भूलियो खिनी म्यार संदेश च की आप लोग अपण पहनावा नि भूल्य अर पश्चमी देशो दग्ध्या नि करया, म्यर पहाड़ माँ ब्यो बरियो मैं कतिगा रौनक आई जांदी विगा ब्याख्या मी सब्दो का माद्यम से नि करी सकदु वि तै हमारी भावना खुदी जाणी जांदी अर ब्यो का राष्यानी का क्या स्वाद आंदी अर पतलो मे भात व् दाव खानी  बखत क्या मजा ए जान्द
              ये दिल्ली माँ पहड़ी गानों का सहारा जीवन चलणु च अर नौकरी भी ढंग  नि च 1  ,  2 साल बाटी घर नि गोउ माँ का खुदी लगनी च ये दिल्ली माँ हवा पाणी तै दूषित च लेकिन मनखा भी दूषित हवे गिना 
  1.                    मी माँ की सेवा भी नि कर सकदु  माँ भी सारा लगी च की कब आला म्यार भवानी लेकिन भवानी का विगत केमा लगुना यख केई भाइयो  तै देखिकी जू अपण माँ का साथ जाणा रांदी उनुतै देखि की म्यार मन  मां अपण माँ का याद एई जांदी अर आँखों माँ आंसू आई जांदी यख माँ मी अपण भावनाओ तै लेखी की बतउनु छू अर एक हथ्ला रूमव पकड़ी की आंसू पूछानु छू दोष सायद मीमा च भगवानल मी तै जन्म दिये लेकिन मी मां का सेवा नि कर सकदा मी सोच्नु चुव की घर माँ जाई की ध्याड़ी मजदूरी करके चेन से रोऊ और माँ का सेवा करू सायद म्यार हुंवा बच्चा तै मेरी माँ आशिर्बाद दे दे और म्यार जन्म सफल होई जय

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